Archive for September 10th, 2007

ग्लोबिश वर्ड Bank

ग्लोबिश - A place where one can borrow money

उच्चारण - बैंक

मतलब - वह जगह जहां रुपयों का लेनदेन होता है

मेरी सैलरी सीधे मेरे बैंक अकाउंट में जाती है - my salary is paid directly into my bank account. बैंक वह जगह भी होती है , जहां जरूरत के मुताबिक उपयोग के लिए ( कुछ भी ) जमा करके रखा जाता है। जैसे उपयोगी पते - ठिकानों का संग्रह (a bank of useful addresses). इससे बने कुछ और Noun हैं। जैसे , Bank Balance- बैंक में जमा धनराशि , Bank book इसे passbook भी कहते हैं। Banker भी इसी से बना है , जो ब्याज पर रुपये देता है। आज भी गांवों में साहूकार और महाजन होते हैं। वहीं , Banking होगा साहूकारी , महाजनी , लेनदेन। लेकिन अगर कोई कर्ज वापस नहीं कर पाया है और कोर्ट ने उसे दीवालिया करार दिया है तो ऐसे व्यक्ति के लिए अंग्रेजी में शब्द है Bankrupt.

Verb के रूप में इसका अर्थ होगा बैंक में पैसा जमा करना - Bank one’s savings. फ्रेजल वर्ब है Bank on यानी भरोसा रखना , आश्रित होना। जैसे , मैं तुम्हारी मदद पर आश्रित हूं - I am banking on your help. Bank का एक मतलब नदी का किनारा ( River Bank ) भी होता है। मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा फिल्म घर संसार का यह गीत तो आपने सुना ही होगा - ये हवा , ये नदी का किनारा चांद तारों का रंगीन इशारा कह रहा है बेखबर , हो सके तो प्यार कर ये समा मिलेगा फिर ना दोबारा

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आज़ादी से पहले के दुर्लभ पोस्ट

आज़ादी से पहले के दुर्ल पोस्ट लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में भारत की आज़ादी से पहले के कुछ दुर्लभ पोस्टरों की एक प्रदर्शनी जारी है. वहाँ से इन पोस्टरों के चित्र जुटाए हैं हमारी उर्दू सेवा के सहयोगी मुसद्दिक़ सनवाल ने.
ईएच शेपहार्ड के इस चित्र में कॉंग्रेस और मुस्लिम लीग को हाथी के रूप में चित्रित किया गया है. यह चित्र 22 मई 1946 को पंच पत्रिका में प्रकाशित हुआ था.
आज़ादी से पहले के दुर्ल पोस्ट,,, साइमन गो बैक
यह पोस्टर 1928 में जारी हुआ. सर जॉन साइमन के नेतृत्व में गठित सात-सदस्यीय समिति को लेकर भारत में काफ़ी नाराज़गी थी. इस समिति के एक अन्य सदस्य थे क्लीमेंट ऐटली जो 1947 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने. इस समिति का उद्देश्य था भारत के भविष्य का फ़ैसला करना और इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था. दिसंबर 1927 में कॉंग्रेस और मुस्लिम लीग के कुछ सदस्यों ने साइमन कमीशन का बहिष्कार किया और जगह-जगह साइमन वापस जाओ के बैनर नज़र आने लगे.
 तस्वीरों में-  आज़ादी से पहले के दुर्लभ पोस्ट
आज़ादी से पहले के दुर्ल पोस्ट... स्वदेशी आंदोलन की रणनीति

इसमें ब्रितानी उत्पादनों का बहिष्कार और स्वदेशी उत्पादनों और उत्पादन तकनीकों को पुनर्जीवित करते दिखाया गया है. स्वदेशी महात्मा गांधी की एक ऐसी नीति थी जिसे उन्होंने स्वराज की आत्मा बताया

आज़ादी से पहले के दुर्ल पोस्ट.. असहयोग वृक्ष और महात्मा गांधी

इस पोस्टर में एक सैनिक भारत रूपी वृक्ष को दमन-नीति की डोर से खींच रहा है. इसके सामने महात्मा गांधी अपनी पत्नी कस्तूरबा बाई के साथ बैठे नज़र आ रहे हैं जबकि एकता की देवी सबको एकजुट रखे हुए है. दोनों चित्रों में कॉंग्रेसी नेता और भगवान कृष्ण यह सारा दृश्य निहारते देखे जा सकते हैं.

आज़ादी से पहले के दुर्ल पोस्ट.. स्वराज्य के लिए संघर्ष

वर्ष 1920 से कॉंग्रेस के प्रचार पोस्टरों में गांधी का संदेश नज़र आने लगा. स्वराज्य के लिए संघर्ष में भारत माता को जंजीरों में जकड़ा दिखाया गया. इसमें तीन रास्ते थे, सरकार के साथ सहयोग, हिंसा और अहिंसा का मार्ग. यह तीसरा ही स्वतंत्रता की देवी तक ले जाता है.

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