ग्रन्थों की मूल पांडुलिपियां कहां संरक्षित हैं

September 11, 2007

प्राचीन भारत में सैकड़ों वर्षों तक ज्ञान मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा. लगभग तीन-चार सौ ईसवी तक भारत में लेखन का कार्य उस तरह से नहीं हुआ. कुछ अभिलेख ज़रूर मिलते हैं. जब लेखन परम्परा शुरु हुई तो ताड़पत्र या भोजपत्र पर ग्रन्थों की रचना हुई. ग्रन्थ का मतलब ही होता है इन पत्रों को छेद करके गांठ में बांधना. सबसे पुरानी पांडुलिपियां पांचवी छठी सातवीं शताब्दी की मिलती हैं. यह कहना बड़ा मुश्किल होगा कि मूल पांडुलिपियां कहां है क्योंकि बहुत सारी पांडुलिपियां ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से ब्रिटन ले जाई गईं जो ब्रिटिश लायब्रेरी में या ऑक्सफ़र्ड लायब्रेरी में सुरक्षित हैं. लेकिन इनका सबसे बड़ा संग्रह भारत में है जैसे बनारस, पूना, पटना और दक्षिण भारत के प्राचीन पुस्तकालयों में ढेरों पांडुलिपियां रखी हैं.

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