Posts filed under 'ज़िन्दगी'

ग्लोबिश वर्ड Bank

ग्लोबिश - A place where one can borrow money

उच्चारण - बैंक

मतलब - वह जगह जहां रुपयों का लेनदेन होता है

मेरी सैलरी सीधे मेरे बैंक अकाउंट में जाती है - my salary is paid directly into my bank account. बैंक वह जगह भी होती है , जहां जरूरत के मुताबिक उपयोग के लिए ( कुछ भी ) जमा करके रखा जाता है। जैसे उपयोगी पते - ठिकानों का संग्रह (a bank of useful addresses). इससे बने कुछ और Noun हैं। जैसे , Bank Balance- बैंक में जमा धनराशि , Bank book इसे passbook भी कहते हैं। Banker भी इसी से बना है , जो ब्याज पर रुपये देता है। आज भी गांवों में साहूकार और महाजन होते हैं। वहीं , Banking होगा साहूकारी , महाजनी , लेनदेन। लेकिन अगर कोई कर्ज वापस नहीं कर पाया है और कोर्ट ने उसे दीवालिया करार दिया है तो ऐसे व्यक्ति के लिए अंग्रेजी में शब्द है Bankrupt.

Verb के रूप में इसका अर्थ होगा बैंक में पैसा जमा करना - Bank one’s savings. फ्रेजल वर्ब है Bank on यानी भरोसा रखना , आश्रित होना। जैसे , मैं तुम्हारी मदद पर आश्रित हूं - I am banking on your help. Bank का एक मतलब नदी का किनारा ( River Bank ) भी होता है। मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा फिल्म घर संसार का यह गीत तो आपने सुना ही होगा - ये हवा , ये नदी का किनारा चांद तारों का रंगीन इशारा कह रहा है बेखबर , हो सके तो प्यार कर ये समा मिलेगा फिर ना दोबारा

Add comment September 10, 2007

चक दे इंडिया

चेन्नई में भारत ने कोरिया को रौंदकर चक दे इंडिया की कहानी को हकीकत में बदल दिया। इस जीत के नायक अग्रिम पंक्ति के खिलाड़ी प्रभजोत सिंह रहे।

Add comment September 9, 2007

न्यूयॉर्क

न्यूयॉर्क प्रशासन चाहता है कि हर टैक्सी में अनिवार्य रूप से जीपीएस यंत्र लगाया जाए जिससे पता चल सकेगा कि टैक्सियाँ कहाँ हैं, और उन्हें नियंत्रित भी किया जा सकेगा.

इस हड़ताल का संचालन करने वालों में दक्षिण एशियाई मूल के लोग ही आगे आगे हैं. भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के टैक्सी चालक इस हड़ताल में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

बुधवार से शुरू हुई इस दो दिन की हड़ताल में हज़ारों की संख्या में टैक्सी चालक भाग ले रहे हैं. आम दिनों में करीब 44 हज़ार टैक्सियाँ शहर भर में चलती हैं. लेकिन हड़ताल के पहले दिन बुधवार को सड़कों पर टैक्सियाँ न के बराबर दिखाई दीं.

 अभी तो यह शुरूआत है अगर प्रशासन होश में न आया तो हम अगले क़दम के लिए भी तैयार हैं. हमारी जायज़ मांगों को सुनने के बजाए इस प्रशासन ने टैक्सी ड्राइवरों के मानवाधिकारों की भी अनदेखी की है

भैरवी देसाई, हड़ताल की नेता

जीपीएस लगाने का टैक्सी चालक यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इसके ज़रिए उनकी निजी ज़िंदगी में दखलअंदाज़ी होती है और उनकी प्राइवेसी छिन जाती है. इसके अलावा इस यंत्र को लगाने औऱ उसकी मरम्मत वगैराह करने का खर्चा भी टैक्सी चालकों को ही भरना पड़ रहा है.

हर टैक्सी ड्राइवर को अपनी टैक्सी में यह यंत्र लगाने में करीब चार हज़ार डॉलर का खर्चा आएगा और उन्हें हर महीने 150 डॉलर के करीब इसका किराया भी देना पड़ेगा.

इसके अलावा टैक्सी के पीछे सवारी के लिए एक टीवी स्क्रीन भी लगानी पड़ेगी, जिसका भुगतान भी इन्हीं ड्राइवरों को करना होगा. साथ में इसी मशीन पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने की भी सुविधा होगी.

संघर्ष

न्यूयॉर्क में टैक्सी चालकों की संस्था न्यूयॉर्क टैक्सी वर्कर्स अलायंस, जो इस हड़ताल को आयोजित कर रही है, उसका दावा है कि हड़ताल में 90 प्रतिशत से भी अधिक टैक्सी चालक भाग ले रहे हैं.

ैरवी देसाई
भैरवी देसाई पहले भी हड़ताल का नेतृत्व कर चुकी हैं

न्यूयॉर्क टैक्सी वर्कर्स अलायंस की निदेशक भारतीय मूल की भैरवी देसाई इस सारी हड़ताल की सर्वेसर्वा हैं. अपनी संस्था को नेतृत्व प्रदान करते हुए भैरवी देसाई ने 1998 में भी एक सफल हड़ताल आयोजित की थी, जिसके बाद टैक्सी चालकों की माँगें मान ली गई थीं.

भैरवी देसाई कहती हैं, “अभी तो यह शुरूआत है अगर प्रशासन होश में न आया तो हम अगले क़दम के लिए भी तैयार हैं. हमारी जायज़ मांगों को सुनने के बजाए इस प्रशासन ने टैक्सी ड्राइवरों के मानवाधिकारों की भी अनदेखी की है.”

शहर में पीले रंग की टैक्सी आम तौर पर हर जगह मिल जाती है, लेकिन इस हड़ताल के कारण अब शहर में एक जगह से दूसरी जगह आने जाने में आम लोगों को मुश्किल हो रही है.

पर्यटकों की भीड़

ख़ास तौर पर आजकल गर्मी की छुट्टियों के कारण और अमरीकी ओपन टेनिस और फ़ैशन वीक के महोत्सव के चलते शहर में पर्यटक भी बड़ी संख्या में आए हुए हैं और वे टैक्सियों का ही इस्तेमाल करते हैं.

 हमें भी अपने परिवार का पेट पालना है और पैसे कमाने हैं लेकिन प्रशासन ने हमारे सामने कोई और विकल्प ही नहीं छोड़ा है इसलिए मजबूर होकर हमें हड़ताल करनी पड़ी है

उपकार सिंह, टैक्सी चालक

उपकार सिंह भारत के पंजाब राज्य से अमरीका आकर करीब 15 साल से न्यूयॉर्क में ही टैक्सी चला रहे हैं. वे दिन में 12 12 घंटे टैक्सी चला कर अपना परिवार चलाते हैं. उपकार सिंह का कहना है कि वह इस हड़ताल में मजबूरन शामिल हुए हैं.

वे कहते हैं, “देखिए हमें भी अपने परिवार का पेट पालना है और पैसे कमाने हैं लेकिन प्रशासन ने हमारे सामने कोई और विकल्प ही नहीं छोड़ा है इसलिए मजबूर होकर हमें हड़ताल करनी पड़ी है.”

आम तौर पर शहर के लोगों का भी रवैया टैक्सी चालकों के हक़ में ही है. एक अमरीकी महिला जो हड़ताल के नारे लगाते हुए कुछ टैक्सी ड्राइवरों को देखकर बोलीं कि इन लोगों को इनका हक मिलना चाहिए.

वह कहती हैं, “लोग बड़ी मेहनत से काम करते हैं और इनकी जो जायज़ मांगें हैं उन्हें प्रशासन को मान लेना चाहिए. मैं टैक्सी ड्राइवरों का इस हड़ताल में समर्थन करती हूँ.”

शुक्रवार को भी दो दिनों के बाद भी यह हड़ताल जारी रहने के आसार नज़र आ रहे हैं क्योंकि न तो टैक्सी चालक और न ही शहर प्रशासन अपने रुख़ में नरमी लाने को तैयार दिख रहा है.

साभार

बीबीसी

Add comment September 7, 2007


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